-लक्षण,उपचार प्रणाली के प्रति किया गया जागरुक  




ऋषिकेश।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में विश्व गुर्दा दिवस के उपलक्ष्य में आम जनता से गुर्दे के रोगों की रोकथाम पर चर्चा की गई और इसके कारण,लक्षण एवं उपचार प्रणाली के प्रति जागरुक किया गया। संस्थान के गुर्दा रोग विभाग व मूत्र रोग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम के अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि संस्थान में जल्द ही २५ से ३० मशीनों वाला नया डायऐलिसस सेंटर स्थापित करने की योजना है।साथ ही निदेशक एम्स प्रो.रवि कांत ने बताया कि इसके अलावा एम्स में मरीजों को गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा भी शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी।  
                                       

निदेशक पद्मश्री प्रो.रवि कांत ने बताया कि ऋषिकेश एम्स यहां आने वाले मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने को प्रयासरत है और इस दिशा में सतत कार्य हो रहा है।

जिससे उत्तराखंड व आसपास के मरीजों को उपचार के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़े।                                                                                                                                                                         
संस्थान के गुर्दा रोग विभाग के सहायक आचार्य डा.गौरव शेखर शर्मा ने बताया कि एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो.रवि कांत के मार्गदर्शन में सालभर में, विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में तीन से चार गुना  वृद्धि हुई है। 
                                      

गुर्दा रोग विभाग की सहायक आचार्य डॉ शैरौन कंडारी ने बताया कि गुर्दा रोगों में चेहरे पर सूजन आना, पैरों में सूजन आना, पेशाब में प्रोटीन एवं रक्त का आना आदि लक्षण आम होते हैं। इस बीमारी में मितली या उल्टी आना, भूख कम लगना और शरीर में खुजली आना, यह सब आम लक्षण भी हो सकते हैं।                                                                        
किडनी की बीमारी हो जाने पर जनता को किडनी की सुरक्षा के लिए ८ स्वर्ण नियमों के बारे में बताया गया। 


१. फ़िट एवं सक्रिय रहें 
२. संतुलित आहार खाएँ 
३. शकर की मात्रा नियंत्रित रखें
४. बी.पी. १३०/८० बनाए रखें
५. नियंत्रित मात्रा में पानी पिएँ
६. धूम्रपान ना करें 
७. दर्दनाशक दवाई , आयुर्वेदिक भस्म  प्रयोग ना करें 
९. यदि किसी को मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा है, या परिवार  में कोई वंशानुगत किड्नी रोग है  उन व्यक्तीयों को अपनी किड्नी की जाँच अवश्य करवानी चाहिए।

डा. शैरौन ने ये भी बताया कि गुर्दे के रोगों को लेकर अधिकांश मरीज़ों में जागृति का अभाव रहता है और समय पर उपचार नहीं हो पाता, जिससे बीमारी के बढ़ने का खतरा और किड्नी के पूर्णरूप से फेल हो जाने का खतरा रहता है।


लिहाजा संस्थान इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर जनजागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन भी करेगा।इसके साथ ही संस्थान के मूत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा.अंकुर मित्तल व प्रो. किम मेमन की देखरेख में डा.विकास कुमार पवार ने लोगों को गुर्दे की पथरी से सम्बंधित जानकारियां दी। 
                                        

उन्होंने लोगों को गुर्दे की पथरी होने के कारण, बचाव व रोकथाम के उपाय सुझाए। उन्होंने गुर्दे में पथरी नहीं बने इससे जुड़ी सावधानियों से लोगों को अवगत कराया। डा. विकास ने बताया कि एम्स संस्थान में इस रोग से जुड़े सभी तरह के उपचार उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि लगातार चिकित्सकीय परामर्श लेने से किडनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। मूत्र रोग विभागाध्यक्ष डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत के मार्गदर्शन में सालभर में विभाग की ओपीडी की संख्या लगभग २५००० हो गई है।                                                                                                                                                                                                                                                
इस अवसर पर संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, गुर्दा रोग एवं मूत्र रोग विभाग के सभी चिकित्सक, रेज़िडेंट चिकित्सक एवं नर्सिंग ऑफिसर मौजूद थे।
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