ऋषिकेश।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वावधान में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ हो गया। 

इस अवसर पर एम्स निदेशक पदमश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि इस प्रकार के सम्मेलनों के आयोजन का मुख्य उद्देश्य हड्डी एवं जोड़ रोग के इलाज में प्रयोग होने वाली नवीनतम विधियों पर चर्चा व अनुभवों को साझा करना है। 


जिससे संस्थान में अध्ययनरत प्रशिक्षु चिकित्सकों एवं देश के अन्य हिस्सों से प्रतिभाग करने वाले चिकित्सकों को लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन से सीधेतौर पर हड्डी एवं जोड़ रोग से ग्रसित मरीज लाभान्वित होंगे। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन में  उत्तराखंड के अलावा हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, दिल्ली  आदि देश के विभिन्न प्रांतों से विशेषज्ञ चिकित्सक प्रतिभाग कर रहे हैं।                         

                                     

उन्होंने बताया कि इसके अलावा सम्मेलन में सिंगापुर, जर्मनी, इंग्लैंड,नीदरलैंड आदि देशों के विशेषज्ञ चिकित्सक भी ​शिरकत कर रहे हैं।इस अवसर पर विभिन्न विषयों से जुड़ी तीन कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।


संस्थान के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डा. पंकज कंडवाल ने बताया कि इसके तहत पहली कार्यशाला में एम्स के हड्डी रोग विभाग के विशेषज्ञ डा.आरबी कालिया ने रोबोट की सहायता से गठिया से ग्रसित जोड़ों को बदलने की विधि का प्रशिक्षण दिया। जबकि दूसरी कार्यशाला में वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. तरुण गोयल की देखरेख में देशभर से आए विशेषज्ञों ने 50 वर्ष से कम आयु के लोगों में गठिया रोग से ग्रस्त घुटने के आधे जोड़ के प्रत्यारोपण की विधि का प्रशिक्षण दिया।  


तीसरी कार्यशाला टाटा मैमोरियल कैंसर हास्पिटल मुंबई के हड्डी कैंसर रोग विशेषज्ञ डा.आशीष गुलिया व समन्वयक डा. मोहित ढींगरा के​ निर्देशन में हड्डी के कैंसर के कारण क्षतिग्रस्त हो चुके जोड़ों का पुनर्निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया,जिसमें रोहतक से आए विशेषज्ञ चिकित्सक डा. जिले सिंह कुंडू व  दिल्ली के डा.सुधीर कपूर के निर्देशन मैं आयोजित की गई। चौथी कार्यशाला एम्स ऋषिकेश के एसोसिएट प्रोफेसर डा. विवेक सिंह के संयोजकत्व में जोशी एक्सटर्नल स्टेबलाइजेशन सिस्टम के माध्यम से विकृत अंगों को सीधा करना,जन्मजात टेढे़ हाथ- पैरों को सीधा करना एवं हड्डियों के फ्रैक्चर का बिना चीरा लगाए ऑपरेशन करने की विधियों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

                                         

जिसमें मेरठ से आए डा. लोकेश मराठा, दिल्ली के प्रोफेसर संदीप कुमार व मुंबई की श्रीमती संध्या कौशिक द्वारा दिया गया। उन्होंने बताया कि पांचवी कार्यशाला में ड्रिल का प्रयोग करके रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन की विधियों का पशु मॉडल पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।एम्स के डा. भास्कर सरकार के संचालन व डा. रजनीश अरोड़ा के निर्देेशन में आयोजित यह कार्यशाला विभागाध्यक्ष पंकज कंडवाल के संयोजकत्व में हुई। 
                                       


इसके अलावा घुटने के नीचे से टेढ़े पैरों को हाई टीबीएल ओस्टियोटोमी द्वारा सीधा करने की विधियां व हाई टीवीएल ओस्टियोटोमी का प्रयोग करके आधे जोड़ गठिया के इलाज का प्रशिक्षण जम्मू  कश्मीर से आए डा. अब्दुल गनी, प्रो.कमर आजम व डा. प्रदीप मीणा द्वारा दिया गया। डा. शोभा एस.अरोड़ा की अध्यक्षता में आयोजित कार्य ने उन्होंने बताया कि सम्मेलन के तहत तीन दिन तक विभिन्न विषयों पर आयोजित कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि अनेक विषयों को लेकर आयोजित किए गए इस  सम्मेलन के आयोजन से चिकित्सकों को कार्य दक्ष बनाने में मदद मिलेगी और इसमें प्रतिभाग कर रहे चिकित्सक लाभान्वित होंगे। 


हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डा.पंकज कंडवाल ने बताया कि तीन दिनी कार्यशाला का शनिवार को एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो.रवि कांत विधिवत शुभारंभ करेंगे।
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