हरिद्वार 9 फरवरी।इन दिनों विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षाओं की तैयारी में विद्यार्थी जुटे हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं के लिए गीतामृत की विशेष कक्षा के माध्यम से  देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने संयम के साथ पढ़ाई करने सहित विभिन्न सूत्रों की जानकारी दी,जो विभिन्न परीक्षाओं में जुटे युवाओं के लिए संजीवनी का काम करेगा। 
विवि के मृत्युजंय सभागार में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि पढ़ाई के लिए समय का संयोजन आवश्यक है। समय पर निर्धारित कार्य (पढ़ाई) पूरा करने से विद्यार्थी का मार्ग प्रशस्त होता है। 

कुलाधिपति डॉ पण्ड्या ने कहा कि संयम से ही विवेक का जागरण होता है और जिन व्यक्तियों में विवेक का जागरण हो गया,वह कभी असफल नहीं हो सकता। विवेकवान व्यक्तियों में मिथ्याचारी, भ्रष्टाचारी, वासना, तृष्णा, अहंता आदि दुर्गुण प्रवेश नहीं कर पाते है, जिससे वे समाज में एक अलग पहचान रखता है। कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जो व्यक्ति इन्द्रिय, समय, विचार और आहार संयम को जीवन में उतारता है, वह सतत प्रगति करता है। गीता मर्मज्ञ डॉ. पण्ड्या ने गीता की अनेक श्लोकों के माध्यम से युवाओं को अनुशासित रहते हुए सद्भाव, सद्विचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया। इससे पूर्व कुलाधिपति ने विद्यार्थियोंं के विविध शंकाओं का समाधान किया। 
                                       

इस अवसर पर संगीत विभाग के भाइयों ने ‘हमने आंगन नहीं बुहारा, कैसे आयेंगे भगवान’ गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भाव विभोर कर दिया। इस अवसर पर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति शरद पारधी, कुलसचिव बलदाऊ देवांगन विभागाध्यक्ष सहित देसंविवि व शांतिकुंज परिवार उपस्थित रहे।
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