ऋषिकेश 9 फरवरी।भारत सरकार से इस साल समाज सेवा के क्षेत्र में पद्मश्री पुरस्कार के लिए नामित इंडोनेशिया के आगस इंद्रा उदय़ाना के सम्मान में शत्रुघन घाट,ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विधान सभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल ने उदय़ाना का फूल मालाओं से ज़ोरदार स्वागत किया।अग्रवाल ने इस दौरान सॉल ओड़ाकर एवं केदारनाथ जी का प्रतीक चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया। 

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष एवं सभी गणमान्य अतिथियों द्वारा गंगा मैया का आचमन कर एवं विधिवत रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर स्कूल बच्चों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने शत्रुघ्न घाट पर गंगा आरती में भी प्रतिभाग किया।
                                     

अवगत करा दें कि आगस इंद्रा उदयाना द्वारा महात्मा गांधी के विचारों का इंडोनेशिया में बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया है।जिसके लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री के लिए नामित किया गया है।उन्हें 2010 में इंडोनिशया का गांधी के खिताब से भी नवाजा गया है।इनके द्वारा इंडोनेशिया के प्राचीन शहर बाली में महात्मा गांधी के मूल्यों पर आधारित चार आश्रम बनाए गए हैं। जहां पर पूरे इंडोनेशिया से लोग आते हैं व कई दिन कार्यशाला व प्रार्थना में भाग लेकर गांधी जी के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। 

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने इंद्रा उदय़ाना को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह इंडोनेशिया के बाली शहर में भारत की संस्कृति एवं महात्मा गांधी जी के विचारों को प्रसारित कर एक प्रेरणादाई कार्य कर रहे हैं।अग्रवाल ने कहा कि गांधीजी का जीवन नदी की भांति ही था जिसमें कई धाराएं मौजूद थीं. उनके जीवन में शायद ही ऐसी कोई बात रही हो जिन पर उनका ध्यान नहीं गया हो या फिर उन्होंने उस पर अपने विचारों को प्रकट नहीं किया हो।संघर्ष और उसके साथ सकारात्मक गतिविधियां, उनके जीवन में एक साथ समानान्तर चलती रहीं।
                                       
इस अवसर पर टीएचडीसी के निदेशक मोहन सिंह रावत गांववासी,शत्रुघ्न मंदिर के महंत मनोज द्विवेदी,मुनी की रेती नगर पालिका के अध्यक्ष रोशन रतूड़ी, पूर्व राज्य मंत्री रमेश उनियाल, आसाराम व्यास,चेतन शर्मा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राजेंद्र राणा, मनोज शर्मा, मनन द्विवेदी, बीमा जोशी, दुर्गा राणा, सुभाष पाल सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।
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