-परमार्थ निकेतन में अहमदाबाद गुजरात से पधारे स्वामी अध्यात्मानन्द 


-प्रकृति के प्रति हमारे जो अधिकार है उन मांगों को कम करके अब अपने कर्तव्यों पर ध्यान देने का समय

-योग भी हमें अहिंसावादी और कर्तव्य परायण होने की ही शिक्षा देता है -स्वामी चिदानन्द सरस्वती



ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में अहमदाबादा, गुजरात की धरती से स्वामी अध्यात्मानन्द पधारे उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट वार्ता की। स्वामी अध्यात्मानन्द ने अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के बारे में चर्चा करते हुये कहा कि परमार्थ निकेतन वास्तव में योग का वैश्विक प्लेटफार्म है। 

यहां से योग,भारतीय अध्यात्म और दर्शन पूरे विश्व में प्रसारित हो रहा है,वास्तव में यह मानवता की अद्भुत सेवा है। उन्होने कहा कि परमार्थ गंगा आरती के माध्यम से विश्व के अनेक देशों में भारत की पवित्र परम्परा, प्रकृति एवं पर्यावरण से जुड़ने का संदेश प्रसारित किया जाता है उससे लोगों के विचारों में अद्भुत परिवर्तन आयेगा।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में पूरे विश्व को अहिंसा और शान्ति की नितांत अवश्यकता है। गांधी के कथन को याद करते हुये कहा कि ’’किसी व्यक्ति के लिये व्यक्तिगत जीवन में अहिंसावादी हुये बिना सार्वजनिक विषयों में अहिंसावादी बनना असम्भव है’’ इसलिये अहिंसा को जीवन का अंग बना कर मानव को प्रकृति और पर्यावरण के साथ भी अहिंसात्मक व्यवहार करना होगा। 
                                      

वर्तमान समय में प्रकृति के सााथ मनसा, वाचा, कर्मणा तथा अपने सर्वोच्च, प्रेम और दयालुता का व्यवहार करना होगा तभी हम इसे जीवंत रख सकतेे हैं। स्वामी ने प्रकृति संरक्षण के सम्बंध में बोलते हुये कहा कि ’’प्रकृति के प्रति हमारे जो अधिकार है उन मांगों को कम करके अब अपने कर्तव्यों पर ध्यान देने का समय हैं।स्वामी ने कहा कि योग भी हमें अहिंसावादी और कर्तव्य परायण होने की ही शिक्षा देता है। 

सब व्यक्ति अपने-अपने कर्तव्यों को समझ लें तो न कहीं हिंसा होगी न अपराध होंगे और न पर्यावरण प्रदूषित होगा और न जल समस्या उत्पन्न होगी ऐसी स्थिति में वास्तव में चारों ओर शान्ति व्याप्त होगी।अहमदाबाद, गुजरात से परमार्थ निकेतन आये स्वामी अध्यात्मानन्द ने कहा कि भारतीय अध्यात्म और धर्मगुरूओं ने मानव और प्रकृति के साथ प्रेम और दया का संदेश दिया है। अगर आज के समय में भी इस पर ठीक से अमल किया जाये तो,जो पर्यावरण प्रदूषण जैसे विकराल समस्याओं का सामना आज पूरा विश्व कर रहा है उसे कम किया जा सकता है। 

उन्होने कहा कि परमार्थ निकेतन द्वारा धर्म के मार्ग पर चलते हुये सहजता के साथ जो पर्यावरण के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार का संदेश प्रतिदिन प्रसारित किया जा रहा है, आगे इसके विलक्षण परिवर्तनकारी परिणाम निश्चित रूप से प्राप्त होंगे।आज की दिव्य गंगा आरती में स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने जल संरक्षण का संकल्प कराया।
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