देहरादून।देश की अधिकांश औपचारिक नौकरियों को अनुबंधित या निश्चित-अवधि (Fixed-Term) रोजगार में बदल दिया गया है।नौकरी की सुनिश्चितता जैसे कि यह हमेशा परिकल्पित किया गया था,से समझौता किया गया है और श्रमिकों को हमेशा बाहर फेंके जाने/बदल दिए जाने का डर होता है। यही डर उनके शोषण का अग्रगण्य कारण है से भारतीय मजदूर संघ ठेकेदारी और अनुबंधित/आकस्मिक नौकरियों का विरोध करता है और मांग करता है कि...

1. सभी अनुबंध, निश्चित-अवधि, आकस्मिक, दैनिक मजदूरी और अस्थायी श्रमिकों को स्थायी रोजगार में नियमित किया जाये। श्रमिकों में उद्योग/कार्य के प्रति अपनेपन की भावना पैदा करने के लिए उनकी नौकरियों का औपचारीकारण आवश्यक है। यह उनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए जरूरी है। 

2. हम मांग करते हैं कि आंगनवाड़ी,आशा,आशा फैसिलिटेटर,पीडीएस,भोजन माता,एनएचएम आदि सरकारी योजनाओं में काम करने वाले सभी स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी योग का दर्जा दिया जाये। ये लोग अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह ही मेहनत करते हैं और इसलिए अन्य कर्मचारियों की भांति ही इनको भी सभी लाभ मिलना चाहिये। 
                                        

3. सरकार की को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण, विनिवेश,रणनीतिक बिक्री और निगमीकरण को रुकना चाहिए। सार्वजनिक उपक्रम भारतीय औद्योगिक संरचना और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार को इनके नीतिगत विनिवेश/निजीकरण को रोकना चाहिए। एफडीआई को रोकना होगा। रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश/निजीकरण राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। भारतीय रेल जो एक आवश्यक सेवा और भारतीय शहरों की जीवन रेखा है, का निगमीकरण बंद होना चाहिए।

4. हम श्रम कानूनों में 4 कोडो में संहिताकरण के लिए सरकार के प्रयासों का की सराहना करते हैं। लेकिन हमने देखा है कि कोड में कई प्रावधान प्रभावी रूप से श्रम-विरोधी हैं/श्रमिकों के सामान्य हित को चोट पहुंचाते हैं। लेवर कोड्स में से श्रमिक विरोधी प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए। हम संबंधित मंत्रालय के सामने अपनी टिप्पणी पहले ही प्रस्तुत कर चुके हैं। उद्योगो/ उद्योगपतियों के साथ सांठगांठ से देश में स्थापित नौकरशाही विभिन्न कानूनों और नियमों की आड़ में हमेशा से मजदूरों की बार्गेर्निंग पावर और श्रमिकों के अन्य अधिकारों का हनन करने की कोशिश की जाती रही है। इस पर अविलंब अंकुश लगाना होगा।

5. श्रमिकों के न्यूनतम वेतन सहित मौजूदा श्रम कानूनों में को समर्था से लागू किया जाना चाहिए। कानून लंबे समय से मौजूद है और नीतिकारो का इरादा स्पष्ट है लेकिन कानून परावर्तन होने के कारण जमीनी प्रथाओं को बदलने में कारगर नहीं रहे हैं। मौजूदा कानूनों के उचित कार्यान्व्यन से कार्यस्थल में कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है था।

6. आयकर सीमा को पांच से बढ़ाकर 8 लाख किया जाना चाहिए। 

7. एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कोड बना जाना चाहिए। देश के संरक्षक के तौर पर यह सरकार का कर्तव्य है कि वह सभी को लिए न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करें। सरकार मानव-पूंजी निर्माण के लिए पोषण,आवास,चिकित्सा सुविधाए,शिक्षा आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए निवेश करें और इन केवल राष्ट्रीय खातों से डेबिट के रूप में नही देखे। हाथकरधा, कृषि, निर्माण, मत्स्य पालन इत्यादी सहित सभी क्षेत्र में वैधानिक वेलफेयर बोर्ड बनाये जाए। असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों जो भारत के कुल कार्यबल का 93% है उनको कानूनी दायरो में सामाजिक सुरक्षा मिले।

8. सीसीए पेंशन को पुनः बहाल किया जाये। एनपीएस को हटाया जाये। पुरानी पेंशन योजना काफी बेहतर और प्रभावी थी।

9. ईपीएस पेंशन सभी के लिए बढ़ाकर न्यूनतम 5000 की जाये।

10.  उत्तराखंड प्रदेश के संबंधित कई विभागों में 7 वाँ पे-कमिशन लागू नहीं हुआ है, उसे तुरंत लागू किया जाये।
                                      

11. सवायत्त/नागरिक पालिका निकाय धन की कमी से जूझ रहे हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन निकायों को उनके कामकाज के लिए पर्याप्त धन की पूर्ति की जाए। Cess-based वेलफेयर स्क्रीमें GST आ जाने से पैसों की कमी से जूझ रही है। बजट में राज्यों को प्रदत्त दी गई राशि किसी स्कीम से जुड़ी हुई नहीं होती। पहले के अभ्यासो के अनुसार फंड को उचित मंदो के अंतर्गत भेजा जाये ताकि सरकारी धन की राजनीति उपयोग रोका जाये।

12. असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों को समान काम का समान वेतन मिले। वेतनमान या मानदेय मिलने में विलंब ना हो। जहां लागू हो वह यात्रा भत्ता भी दिया जाये। जिनका कर्मचारियों का पंजीकरण नहीं है उनका पंजीकरण तत्काल किया जाये।

13. सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को अब डिजिटल कर दिया गया है। यह श्रमिकों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है। निरक्षरता/ डिजिटल निरक्षरता, विभिन्न केंद्रों से फॉर्म भरने के लिए दी जाने वाली फीस, उपभोक्ताओं के लिए अपर्याप्त इंटर-फ़ेस, इंटरनेट कनेक्शन समस्याएं आदि जैसे विभिन्न समस्याओं के ने योजनाओं के लक्षित लाभार्थियों का जीवन कठिन बना दिया है। हम मांग करते हैं कि मैनुअल तरीके (पहले से मौजूद) को बाल किया जाए और डिजिटल करण को धीरे धीरे हासिल किया जाए। बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण किया जाना चाहिए।

       
अत: सरकार को जगाने के हम भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ता आज 03 जनवरी 2020 को देशभर के सभी जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन करे हुए जिलाधिकार के माध्यम से अपको ज्ञापन और मांग पत्र प्रेरित कर रहे हैं ताकि सरकार हम श्रमिकों की समस्याओं पर गौर करें और तत्काल समस्याओ का समाधान करें।


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