-दिव्य गंगा आरती और सत्संग में किया सहभाग

-जल और जमीन से जुड़े जर्मनी

-जल संरक्षण के लिये सभी को साथ आना है सभी को साथ निभाना है -स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश।11 जनवरी, ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में जर्मनी से 70 से अधिक लोगों का एक दल पधारा। दल के सदस्यों ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सस्वती महाराज से भेंटवार्ता कर,दिव्य गंगा आरती और सत्संग में सहभाग किया।


जर्मनी से आये दल के सदस्यों से स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने जल,जंगल और जमीन पर बढ़ते प्रदूषण के बारे में चर्चा करते हुये कहा कि यह समस्यायें किसी एक राष्ट्र की नहीं बल्कि वैश्विक समस्यायें हैं और इनका समाधान भी मिलकर खोजना होगा। जल और जमीन के मुद्दे, वैश्विक मुद्दें है। 

                                        

इन समस्याओं के समाधान के लिये सब को मिलकर कार्य करना होगा।जर्मनी से आये दल में कुछ बच्चे अच्छी गुजराती बोलते और गुजराती में गाते भी है। कई बच्चे गुजरात के गुरूकुलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे है। स्वामी ने कहा कि भारतीय युवाओं के लिये एक संदेश और सबक भी है। अपनी भाषा को न भूलें,अपनी संस्कृति और संस्कारों को न भूलें,उन्होने कहा कि विदेशी भारत में आकर भारतीय संस्कृति को सीख रहे हैं। भारतीय युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि अपनी जड़ों से जुडे़ रहें।


स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून ने कहा था कि ’’कोई वैकल्पिक योजना नहीं है,क्योंकि हमारे पास इस धरती की तरह कोई दूसरा ग्रह नहीं है। यह वास्तविकता आज के युवाओं के लिये चुनौतीपूर्ण है। युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना जरूरी है।’’युवाओं के कन्धों पर मानव सभ्यता को ऊँचाई पर ले जाने की जिम्मेदारी है।

                                         

स्वामी ने कहा कि 21 वीं शताब्दी की वैश्विक चुनौतियों में जलवायु परिवर्तन,जल प्रदूषण और कम होते जंगल सबसे बड़ी समस्या है इसके लिये पर्यावरणीय नैतिकता जरूरी है जिससे हम वैश्विक पर्यावरण को बचा सकते हैं। हमें वैश्विक स्तर पर सतत विकास लक्ष्य को अपनाना होगा जिससे वास्तव में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।


जर्मनी से आये दल ने परमार्थ निकेतन में रहकर योग, ध्यान, सत्संग और संगीत को सीखने की इच्छा व्यक्त की।स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज के पावन सान्निध्य में जर्मनी से आये दल के सदस्यों ने विश्व ग्लोब का जलभिषेक कर जल संरक्षण का संकल्प लिया।
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