-सैकड़ों श्रद्धालुओं ने किये दर्शन 

-मक्कूमठ में शीतकालीन पूजायें शुरू 

मक्कूमठ/ उखीमठ।शुक्रवार 8नवंबर 2019 को तृतीय केदार  तुंगनाथ के कपाट शीतकाल हेतु   6 नवंबर प्रात: 11.30 बजे बंद हो चुके है।इसी दिन चल विग्रह डोली यात्रा चोपता पहुची थी।कल द्वितीय पड़ाव भनकुन में प्रवास किया और डोली ने आज   8 नवंबर 11 बजे दिन में शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ हेतु प्रस्थान किया। मार्ग में स्थित ग्वाड़ - बिड़ना गांव में भक्तों द्वारा डोली यात्रा का भब्य स्वागत  किया गया। 2.30 बजे अपराह्न डोली शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ पहुंची।गद्दीस्थल पहुंचने के बाद पूजा -अर्चना हुई जहां हजारों लोगों ने बाबा तुंगनाथ की डोली के दर्शन किये एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। 
                            
                              
                             

उल्लेखनीय है कि डोली यात्रा पैदल तुंगनाथ मंदिर से शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचती है।डोली को भंडार के निकट मंदिर परिसर में दर्शनार्थ रखा गया है।तुंगनाथ की डोली यात्रा के मारकंडेय मंदिर मक्कूमठ पहुंचते ही यहां  भगवान तुंगनाथ की शीतकालीन पूजायें भी शुरू हो गयी हैं। इस अवसर पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर  समिति के उपाध्यक्ष अशोक खत्री,पूर्व विधायक आशा नौटियाल,मठापति रामप्रसाद मैठाणी,मंदिर सुपरवाइजर यदुवीर पुष्पवान,प्रबंधक प्रकाश पुरोहित,जिला पंचायत सदस्य रीना बिष्ट,प्रधान विजयपाल नेगी,नागेन्द्र भट्ट, घनानंद 
                             
     
नौटियाल,मोहन प्रसाद मैठाणी,मीना पुंडीर,खुशहाल सिंह नेगी,कुंवर सिंह,धर्मेंन्द्र तिवारी,जीतपाल भंडारी,हरिबल्लभ मैठाणी,भरत, अनुज,आशीष,लंबोदर मैठाणी,राहुल किमोठी विजय  मैठाणी, सुबोध मैठाणी आदि मौजूद रहे।जारी प्रेस बयान में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल सहित उपाध्यक्ष अशोक खत्री एवं मुख्य कार्याधिकारी बी.डी. सिंह, कार्याधिकारी एन.पी.जमलोकी ने  तुंगनाथ की डोली यात्रा के शीतकालीन गद्दीस्थल 
                                  
मक्कूमठ पहुंचने के अवसर पर प्रसन्नता जताई है।वहीं मंदिर सुपरवाइजर/प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्पवान ने बताया कि इस वर्ष भी तुंगनाथ उखीमठ क्षेत्र में दिवारा  यात्रा पर निकलेंगे जिसकी तिथि शीघ्र घोषित की जानी है।मंदिर समिति मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि तुंगनाथ की उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचने के बाद आज से भगवान तुंगनाथ की शीतकालीन पूजायें शुरू हो गयी हैं।
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