ऋषिकेश।। नगर निगम ऋषिकेश के इंदिरा नगर में स्थित इंद्रेश्वर महादेव मंदिर में हुआ शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर  सत्यनारायण रक्षा सूत्र पूजा कथा का आयोजन।और आपको बता दें इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर महन्त व आह्वान अखाड़े के मण्डलेश्वर महन्त दुर्गा राम चरण दास गिरी  ने बताया की भारतीय धर्म और पुराणों में हर चीज का अर्थ बताया गया है, बेवजह यहां कोई भी चीज नहीं होती है,ऐसी ही एक चीज है 'रक्षा सूत्र' जिसे कि 'कलेवा' या 'मौली' के नाम से जाना जाता है। अक्सर 
                             

पूजा के बाद पंडित जी तरह-तरह के मंत्रों को पढ़ते हुए लोगों के कलाई पर इसे बांधते हैं, आम तौर पर ये महिलाओं की बाईं कलाई पर और पुरूषों की दाईं कलाई पर बांधा जाता है लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि ये क्यों और किसलिए बांधा जाता है, क्या ये छोटा सा धागा आपकी रक्षा कर सकता है, तो साथियों ये भरोसे की बात है, अक्सर इस धागे को बहुत से विश्वासों के साथ कलाई पर बांधा जाता है, जिसके कारण ये अमूल्य शक्ति का पर्याय बन जाता हैमाना जाता है कि यज्ञ में जो यज्ञसूत्र बांधा जाता था उसे आगे चलकर रक्षासूत्र कहा जाने लगा। कुछ पौराणिक कथाओं में इसका जिक्र है जिसके अनुसार भगवान विष्णु के वामनावतार ने भी राजा बलि के रक्षासूत्र बांधा था और उसके 
                               

बाद ही उन्हें पाताल जाने का आदेश दिया था।रक्षासूत्र बांधते समय एक मंत्र बोला जाता है।आज भी रक्षासूत्र बांधते समय एक मंत्र बोला जाता है उसमें इसी घटना का जिक्र होता है। भारत में सभी पूज्य और आदरणीय लोगों को रक्षासूत्र बांधने की परंपरा रही है। वृक्षों की रक्षा के लिए वृक्षों को रक्षासूत्र और परिवार की रक्षा के लिए मां को रक्षासूत्र बांधने के दृष्टांत भी इतिहास में मिलते हैं।

मंत्र
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
और कथा वाचन के पश्चात सभी भक्तों को प्रसाद वितरण का कार्य किया गया।
Share To:

Post A Comment: