ऋषिकेश।।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश व एम्स दिल्ली के संयुक्त प्रोग्राम के तहत जनरल थोरेसिक सर्जरी कार्यशाला के दूसरे दिन मंगलवार को 12 वर्षीय किशोरी की पहली सफल सर्जरी की गई। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने चिकित्सकीय टीम को सफल सर्जरी के लिए बधाई दी। निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने कहा कि ऐसे जटिल ऑपरेशनों में एजुकेशन एवं ​स्किल को बांटने से ही इस क्षेत्र का विकास संभव है। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि संस्थान में मरीजों को वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने को निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं,जिससे मरीजों को किसी भी तरह के उपचार के लिए उत्तराखंड से बाहर नहीं जान पड़ा।चिकित्सकों ने बताया कि मुजफ्फरनगर निवासी एक 12 वर्षीय किशोरी की छाती के दायीं ओर काफी समय से बड़ी गांठ थी, जिसने पूरे दाएं फेफड़े को दबाया हुआ है। इस वजह से किशोरी को सांस लेने में तकलीफहोती थी व हरवक्त असहनीय दर्द रहता था। एम्स ऋषिकेश में 
                              

मंगलवार को दिल्ली एम्स के थोरेसिक सर्जन डा. विपलव मिश्रा के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।उन्होंने बताया कि किशोरी की छाती में बनी यह गांठ बुरी तरह से पूरे फेफड़े व फेफड़े की मुख्य धमनियों से चिपकी हुई थी। जिसे बड़ी सावधानी से मरीज की छाती से निकाला गया। सर्जरी के दौरान एनेस्थिसिया टीम का नेतृत्व डा. यशवंत सिंह पयाल व डा. डीके त्रिपाठी ने किया। ऑपरेशन टीम में डा. नरेंद्र चौधरी,डा. मधुर उनियाल, डा. अजय कुमार,डा. नीरज कुमार, डा. अवनीश आदि शामिल थे।एम्स ऋषिकेश के थोरेसिक सर्जरी के प्रभारी डा. मधुर उनियाल ने बताया कि बच्ची ऑपरेशन के बाद पूरी तरह से स्वस्थ्य है, मरीज को अस्पताल से जल्दी छुट्टी दे दी जाएगी। उन्होंने बताया कि संस्थान में अब इस तरह की सर्जरियां नियमिततौर पर की जाएंगी। डा. मधुर ने इस सफलता का श्रेय संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत के कुशल मार्गदर्शन व ट्रामा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम के सकारात्मक सहयोग को दिया।
Share To:

Post A Comment: